Sunday, November 29, 2009

झुमका

वो एक ही खोया हुआ झुमका
हर बार घर के अलग अलग कोनों में मिल जाया करता है
तो लगता है दो पल की उम्मीद को
कि दो हैं, दोनों ही हैं
एक यहाँ तो एक वहां
अकेला नहीं वो
भ्रम है शायद, जाने सच क्या है
झुमका झुठला रहा है
कहानियाँ बना रहा है
फिर सजने को ललचाता है
किसी को पूरा नज़र आना चाहता है
खोया वो तो न था,
फिर क्यूँ अकेला अधूरा हो वो
इस बार बस ख़ुद से ही पूरा हो वो
एक अकेला झुमका जो घर में
बार बार मिला करता है।

Sunday, November 22, 2009

पत्थर पत्थर, ईंट ईंट, हवा हवा
टुकड़ा टुकड़ा सब तलाश लिया है
तू न कहीं मिला
आईने से खो गया था
सपने में सो गया था
ख़ुद सा ही हो गया था

ज़हर ज़हर, पहर पहर
घुला घुला, गुमा गुमा
सब तलाश लिया ...
आंसुओं की भीड़ में
हथेली की हर लकीर में
कलेजे के गुबार में
ग़म के खुमार में
नशा नशा, छुपा छुपा
बुझा बुझा, जला जला
सब तलाश लिया है
तू कहीं न मिला
बटोर बटोर, कठोर कठोर
जाने तू कब निकला किस और
बंधी रह गई एक डोर
एक मेरा छोर एक तेरा छोर,
पकड़ पकड़, जकड जकड
इधर इधर, अधर अधर,
सब तलाश लिया है
तू कहीं न मिला

Tuesday, June 9, 2009

आज ख़ुद...

आज ख़ुद अपनी उन्ग्लिओं को छू के देखा
सहलाया
उसका एहसास हो जैसे
मन को बहलाया

Wednesday, May 13, 2009

कगार पे...

पैने चाकू की धार पे
किसी तीर पे तलवार पे
लहरों के गुबार पे
हवाओं के खुमार पे
barasne के aasaar पे
कांच की दीवार पे
मिटटी की दरार पे

bematlab हुए bekaar पे
bujhte हुए deedaar पे
एक आखिरी हुंकार पे
किसी पीर की मजार पे
मैं hun अब ...
कगार पे


Friday, May 8, 2009

pooranmaasi

Wo kehte hain aaj pooranmaasi hai
Chaand poora hua lagta hai
Mujhe toh nahin dikhta
Har khidki se jhaank jhaank dekha hai
Roz ghuma ghuma kar
Ulat palat kar dekha hai
Kahin kahin se kataa hi dikha
Poore se toh ghataa hi dikha
Ek tukda toh mere paas hi raha tha
Diya jab usne khud hi kaha tha
Yeh tera hua aaj se…bas tera…
Phir kaise hua hoga?
Duniya ko toh aadat hai,Wo kya jaanein
maine kitne kareeb se dekha hai jaana hai
Ki wo bheetar se kitna adhoora lagta hai
Par wo kehte hain aaj pooran masi hai
Chaand poora hua lagta hai

Sunday, April 26, 2009

bedakhal

Bedakhal

Khamosh, khabardaar
Bahut ho chuki taqraar
Ab diya hai yeh karaar
Bedakhal…
Na honge ab sawaal
Bekaar sab bawaal
Rahe na koi malaal
Bedakhal…
Aawaz mat uthaana
Alfaaz mat sunaana
Ilzaam mat lagaana
Bedakhal…
Ab ashk mat dikhao
phir ishq mat batao
Bas jao chale jao
Bedakhal
Rekhayein kheench lenge
Wo aankhein seench denge
Khud apni meech lenge
Bedakhal
Na sulaah ki ab wajeh ho
Yeh baat ab se tay ho
Ki tum ho abhi se, aaj se
Har pal
bedakhal

Thursday, April 16, 2009

अब तो

यह उनकी ताक़त का इम्तिहान है

अब तो दिल से निकाल फेंकेंगे तभी दम लेंगे

kharochen भर रह जाएँगी

नामोनिशान मिट जाएंगे

गर कुछ पुराने दाग होंगे

साथ में छिल जायेंगे

ज़ख्मों का क्या है सिल जायेंगे

दर्द से ही जी लेंगे

खुशबुएँ बदन से आएँगी भी उनकी कभी

तो साँस पर काबू करेंगे, रोक लेंगे

आहटों को गुजरने देंगे रास्तों से, बेपरवाह

पहचाने भी तो raundte से चल देंगे

यह उनकी ताक़त का इम्तिहान है
अब तो दिल से निकाल फेंकेंगे तभी दम लेंगे